मेरठ: आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में 58 वर्षीय किसान लख्मी सैनी की मौत का मामला सामने आया है। घटना जानी थाना क्षेत्र के किठौली गांव की है। मंगलवार को किसान सुबह करीब 6 बजे गन्ने के खेत में काम के लिए गए थे, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटे। परिवार की चिंता बढ़ी तो उनका पोता ईशांत उन्हें तलाशने खेत पहुंचा।
ईशांत के मुताबिक, गन्ने के पास पहुंचने पर उसने देखा कि कुत्तों का झुंड उसके बाबा पर हमला कर रहा था। उसने कुत्तों को भगाने की कोशिश की, लेकिन कुत्ते उसकी तरफ भी दौड़ पड़े। डर के कारण वह गांव की ओर भागा और परिजनों तथा ग्रामीणों को जानकारी दी। जब तक लोग लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे, किसान की मौत हो चुकी थी।
इस घटना ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को झकझोर दिया है। सबसे ज्यादा दर्दनाक पहलू यह है कि मृतक के पोते ने अपने दादा को बचाने की कोशिश की, लेकिन कुत्तों के झुंड के सामने वह खुद भी असहाय हो गया। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद से बच्चा मानसिक रूप से बेहद परेशान है और बार-बार वही दृश्य उसकी आंखों के सामने आ रहा है।
गांव के प्रधान विनोद कुमार ने दावा किया कि पिछले छह महीनों में कुत्तों के हमले से गांव में यह चौथी मौत है। यदि यह दावा सही है, तो मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों की बढ़ती समस्या की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने आर्थिक सहायता और हिंसक कुत्तों को पकड़ने की व्यवस्था की मांग की है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। सीओ सरधना के अनुसार घटना की जांच की जा रही है और वन विभाग को भी सूचना दी गई है, ताकि आवारा एवं हिंसक कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई की जा सके।
बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कितनी प्रभावी व्यवस्था करता है। ग्रामीण इलाकों में खेतों और सुनसान रास्तों पर झुंड में घूमने वाले आक्रामक कुत्ते किसानों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। लख्मी सैनी की मौत के बाद अब ग्रामीणों की मांग है कि कार्रवाई घटना के बाद नहीं, बल्कि खतरा पैदा होने से पहले हो।
